इस पुस्तक का महत्व इस लिए भी है कि यह उर्दू साहित्य में एक नए युग की शुरुआत का प्रतीक है। टाबीर उर रॉया ने उर्दू साहित्य में एक नए दिशा की ओर संकेत किया और आगे के लेखकों को प्रेरित किया।